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जय माता जी ����

ॐ ओम बन्ना परिचय

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                        ॐ ओम बन्ना परिचय ॐ   ओम   बन्ना   परिचय ओम   सिंह   राठौड़   से   ॐ   बन्ना   तक   ॐ ओम बन्ना परिचय     ॐ   ओम   बन्ना   परिचय ओम   सिंह   राठौड़   से   ॐ   बन्ना   तक परिचय " ओम   बन्ना "  और   उन   का   वह   स्थान   जिसे   आज   पुरे राजस्थान   ही   नहीं   पुरे   भारत   भर   में   ओम   बन्ना ,  ॐ   बन्ना , बुलेट   मोटर   साईकिल   वाले   राठौड   बन्ना ,  चोटिला   राजा और   बुलेट   वाले   बाबा   जेसे   कई   नामो   से   जाना   जा   रहा है   और   यह   ही   वह   दुर्लभ   देव   स्थान   है   जहा   ओम   बन्ना के   साथ   साथ   बु...

चित्तौड़गढ़ दुर्ग

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जय माता जी की सा 🙏  आज हम आपको ले चलते हैं राजस्थान की आन बान और शान कहे जाने वाले दुर्ग चित्तौड़गढ़ दुर्ग में  मध्यमिका नगरी के पतन के बाद चित्रकूट   पहाड़ी पर   7वी सदी में दुर्ग की नीव रखी गई ।  कालांतर में partihar, चालुक्य , परमार तथा सिसोदिया शासको द्वारा इसका समय समय पर विकास और विस्तार होता रहा। यह दुर्ग मत्स्याकार पहाड़ी पहाड़ी   पर स्थित है, जो दो प्राचीरो से घिरा हुआ है। दुर्ग में सात प्रवेश द्वार है तथा राजमहल , कलात्मक मंदिर , जलाशय आदि बने हुए हैं। दुर्ग पर बने प्राचीन तीर्थ स्थल गोमुख कुण्ड के उत्तर पूर्वी कोण पर महाराणाकुम्भा   द्वारा कीर्ति(विजय) स्तंभ का निर्माण करवाया जो 47 फीट वर्गाकार व 10 फीट ऊंची जगती (चबूतरा) ,122 फीट की ऊंचाई लिए नौ मंजिला स्मारक है जो अपने स्थापत्य में बेजोड़ है । नौ मंजिला विजय स्तम्भ में असंख्य देवी देवताओं की मूर्तियां उत्कीर्ण है, इसलिए इसे " भारतीय मूर्तिकला का शब्दकोश"   भी कहा जाता हैं । #chittorgardh #History #fort #Rajasthan  #Rajputiofficial 

महाराणा प्रताप सिंह जी की जीवनी

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वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी  जीवन परिचय    ----- महाराणा प्रताप, मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के सदस्य और मारवाड़ के राजपूत राजा थे। उनका जन्म 9 मई 1540 में हुआ था । महाराणा प्रताप को वीर गाथा और वीर योद्धा के रूप में सम्मानित किया जाता है। उनकी प्रतिभा, साहस और देशप्रेम का प्रदर्शन उन्हें एक महान राजपूत योद्धा बनाते हैं। महाराणा प्रताप के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने गर्व से कहा था, "जीवन में एक बार आपको अपने देश के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे लोग आपके नाम को याद करें।" और वे अपने वचनों को सत्य करने के लिए जीवन भर कार्यरत रहे। आगे जारी है..

राजपूत समाज और राजनीति

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राजपूत समाज और वोट जय माता जी की सा 🙏🙏 #राजपूत #Rajputiofficial http://youtube.com/Rajputiofficial हजारों साल देश की राजनीति में दखल रखकर राज करने वाली क्षत्रिय जाति, जिसका सदियों राज करने के कारण नाम भी राजपूत पड़ा, 1947 में सत्ता हस्तांतरण के बाद 71 वर्ष बाद भी राजनैतिक रूप से दोराहे पर खड़ी है। अब प्रश्न उठता है कि इतने वर्षों बाद भी राजपूत जाति वोट तंत्र का महत्त्व क्यों नहीं समझ पाई ? जबकि सदियों तक राजनैतिक रूप से हासिये पर पड़ी जातियां आज लोकतंत्र में सत्ता का स्वाद ले रही है। राजपूत जाति ने इस देश के धर्म, अस्मिता, स्वतंत्रता, स्वाभिमान व संस्कृति को बचाये रखने के लिए एक से बढ़़कर एक बलिदान दिए। मातृभूमि की रक्षा के लिए राजपूत जाति सिर कटवाने में कभी पीछे नहीं रही, पर अफसोस आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोकतंत्र में सिर गिनवाने के महत्त्व को आज तक नहीं समझ पाई। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से पहले देश में देशी रियासतों का शासन था। जिसमें राजपूत रियासतें प्रमुख थी। रियासती काल में आम राजपूत अपने राजा के प्रति वफादार रहा और राजपरिवार के लोगों को ही उसके जन्मजात व ...

राजपुतो के पतन का कारण

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जय माता जी की सा  आपको ये पोस्ट बुरी जरूर लगेगी , किन्तु सत्य हमेशा कड़वा होता है ।। अब हमे इस सत्य को स्वीकार करना चाहिए । राजपूतों ने जब से मांसाहार और शराब को अपनाया तभी से मुगल शैतानो से पराजित होना शुरू हुआ… राजपूतों का सिर धड से अलग होने के बाद कुल देवी युद्ध लडा करती थी… “एक षड्यंत्र और माँस और शराब की घातकता….” हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि देवी को शराब चढ़ाई जाये.., ग्रंथ नहीँ कहते की शराब पीना ही क्षत्रिय धर्म है.. ये सिर्फ़ एक मुग़लों का षड्यंत्र था हिंदुओं को कमजोर करने का ! जानिये एक सच्ची ऐतिहासिक घटना… “एक षड्यंत्र और शराब की घातकता….” कैसे हिंदुओं की सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया मुग़लों ने ?? जानिये और फिर सुधार कीजिये !! मुगल शैतान का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे । उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की “है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में ?” सभा में सन्नाटा सा पसर गया ,एक बार फिर वही दोहराया गया ! तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी से चिल्ला कर कहा “है कोई हमसे बहादुर जो हि...

माँ पद्मावती

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✍उठो कंवर सा कलम सम्हालो या तेज करो समशीर। अब सोयां तो इतिहास मिटैलो थानै कुण कैसी क्षात्र वीर।। ✍शाका भूल्या,जौहर भूल्या,भूल्या राणा री समशीर। किंया आसी नींद कुँवर सा,अब भांड खींचण लाग्या रजपूती रो चीर।। उठो कुँवर सा................. ✍सतींया और जुझार गमा सी रजपूती पहचाण? राणा जी री संतान गमा सी रावलीया अभिमाण?? कठै गई मरोड़ भँवरसा,कठै चौहाणा रा तीर? उठो कुँवर सा............. ✍रजवाड़ी पहचान मिटासी ओ भंसाली भांड। महा सती री लाज बेच सी एक नाचण आली रांड।। किंया करोला बर्दास्त कंवरसा किंया बंधास्यो पूर्वजां नै धीर?? ✍उठो कुँवर सा कलम सम्हालो या तेज करो समशीर। अब सोयां तो इतिहास मिटैलो थानै कुण कैसी क्षात्र वीर।। कुँवर विरेन शेखा वत लला ना 9529976298

गणगौर पर्व

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                      🙏 गणगौर पर्व 🙏                                        अपने प्राकृतिक सौंदर्य एवं समृद्ध इतिहास की वजह से राजस्थान की रेत के कण-कण में पर्यटकों की रुचि स्पष्ट दिखती है। भारत ही नहीं, विश्व के पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले राजस्थान में आयोजित होने वाले मेले एवं उत्सव इसे और विशिष्ट रूप प्रदान करते हैं। अब जब कि हवाओं पर वसंत का मौसम राज कर रहा है तब राजस्थान में इस ऋतु पर और रंगोत्सव होली का रंग लगातार छाया हुआ है। वसंत के आगमन की खुशी में उदयपुर में मेवाड़ उत्सव तथा जयपुर में देवी पार्वती को समर्पित गणगौर उत्सव की धूम अभी से व्याप्त है। आप इस दृश्य की कल्पना करें ! होली के दूसरे दिन से ही गणगौर का त्योहार आरंभ हो चुका है जो पूरे 18 दिनों तक लगातार चलता रहेगा। बड़े सवेरे ही गाती-बजाती स्त्रियां होली की राख अपने घर ले गईं। मिट्टी गलाकर उससे सोलह पिंडियां बनाईं, दीवार पर सोलह बिंदियां कुंकु...

राजपुताना कविता / Rajputana poem

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राजपुताना  की आवाज      🙏 जय माता जी 🙏   🚩🚩🚩🚩   चैत्र नवरात्र हिंदू नववर्ष   विक्रम संवत 2074   की आपको और आपके परिवार  को      बहुत-बहुत शुभकामनायें                    आग धधकती है सीने मे, आँखोँ से अंगारे, हम भी वंशज है राणा के, कैसे रण हारे…? कैसे कर विश्राम रुके हम…? जब इतने कंटक हो, राजपूत विश्राम करे क्योँ, जब देश पर संकट हो. अपनी खड्ग उठा लेते है, बिन पल को हारे, आग धधकती है सीने मे, आँखोँ से अंगारे। सारे सुख को त्याग खडा है, राजपूत युँ तनकर, अपने सर की भेँट चढाने, देशभक्त युँ बनकर.. बालक जैसे अपनी माँ के, सारे कष्ट निवारे. आग धधकती है सीने मे, आँखोँ से अंगारे। उठो जागो राजपुताना तुम्हें पुकार रहा हैं । कुंवर विरेन्द शेखावत