चित्तौड़गढ़ दुर्ग

जय माता जी की सा 🙏 
आज हम आपको ले चलते हैं राजस्थान की आन बान और शान कहे जाने वाले दुर्ग चित्तौड़गढ़ दुर्ग में 
मध्यमिका नगरी के पतन के बाद चित्रकूट पहाड़ी पर  7वी सदी में दुर्ग की नीव रखी गई । 
कालांतर में partihar, चालुक्य , परमार तथा सिसोदिया शासको द्वारा इसका समय समय पर विकास और विस्तार होता रहा।

यह दुर्ग मत्स्याकार पहाड़ी पहाड़ी  पर स्थित है, जो दो प्राचीरो से घिरा हुआ है। दुर्ग में सात प्रवेश द्वार है तथा राजमहल , कलात्मक मंदिर , जलाशय आदि बने हुए हैं।
दुर्ग पर बने प्राचीन तीर्थ स्थल गोमुख कुण्ड के उत्तर पूर्वी कोण पर महाराणाकुम्भा  द्वारा कीर्ति(विजय) स्तंभ का निर्माण करवाया जो 47 फीट वर्गाकार व 10 फीट ऊंची जगती (चबूतरा) ,122 फीट की ऊंचाई लिए नौ मंजिला स्मारक है जो अपने स्थापत्य में बेजोड़ है ।
नौ मंजिला विजय स्तम्भ में असंख्य देवी देवताओं की मूर्तियां उत्कीर्ण है, इसलिए इसे "भारतीय मूर्तिकला का शब्दकोश"  भी कहा जाता हैं ।

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