राजपुताना कविता / Rajputana poem
राजपुताना की आवाज
🙏 जय माता जी 🙏
🚩🚩🚩🚩
चैत्र नवरात्र हिंदू नववर्ष
विक्रम संवत 2074
की आपको और आपके परिवार को
बहुत-बहुत शुभकामनायें
आग धधकती है सीने मे, आँखोँ से अंगारे,
हम भी वंशज है राणा के, कैसे रण हारे…?
कैसे कर विश्राम रुके हम…? जब इतने कंटक हो,
राजपूत विश्राम करे क्योँ, जब देश पर संकट हो.
अपनी खड्ग उठा लेते है, बिन पल को हारे,
आग धधकती है सीने मे, आँखोँ से अंगारे।
सारे सुख को त्याग खडा है, राजपूत युँ तनकर,
अपने सर की भेँट चढाने, देशभक्त युँ बनकर..
बालक जैसे अपनी माँ के, सारे कष्ट निवारे.
आग धधकती है सीने मे, आँखोँ से अंगारे।
उठो जागो राजपुताना तुम्हें पुकार रहा हैं ।
कुंवर विरेन्द शेखावत
कुंवर विरेन्द शेखावत

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