माँ पद्मावती
✍उठो कंवर सा कलम सम्हालो या तेज करो समशीर।
अब सोयां तो इतिहास मिटैलो थानै कुण कैसी क्षात्र वीर।।
✍शाका भूल्या,जौहर भूल्या,भूल्या राणा री समशीर।
किंया आसी नींद कुँवर सा,अब भांड खींचण लाग्या रजपूती रो चीर।।
उठो कुँवर सा.................
✍सतींया और जुझार गमा सी रजपूती पहचाण?
राणा जी री संतान गमा सी रावलीया अभिमाण??
कठै गई मरोड़ भँवरसा,कठै चौहाणा रा तीर?
उठो कुँवर सा.............
✍रजवाड़ी पहचान मिटासी ओ भंसाली भांड।
महा सती री लाज बेच सी एक नाचण आली रांड।।
किंया करोला बर्दास्त कंवरसा किंया बंधास्यो पूर्वजां नै धीर??
✍उठो कुँवर सा कलम सम्हालो या तेज करो समशीर।
अब सोयां तो इतिहास मिटैलो थानै कुण कैसी क्षात्र वीर।।
कुँवर विरेन शेखावत
ललाना
9529976298
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